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| होम | कृषी पणन मित्र |
ऑगस्ट २०१० |
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अनुक्रमणिका |
| विषय | लेखकाचे नाव | पान क्र. |
| *संपादकीय | ५ | |
| * पीक कर्ज व्याज सवलत: शेतक-यांसाठी वरदान |
मा.ना.श्री.हर्षवर्धन पाटील | ७-१० |
| * लागवड साहित्य आयात करण्याकरीता
अनुसरावयाची कार्यपद्धती |
गोविंद ग. हांडे | ११-१५ |
| * कृषी व्यवसायातील होणारे अपघात | मोहन अ. शिरगांवकर | १६ |
| * केळी उत्पादन व निर्यातीवर एक दृष्टीक्षेप | डॉ. स्वाती चौधरी | १७-१८ |
| * भारतीय कृषीचा विकास,अडचणी व
विकास |
डॉ. बी. आर. पवार | १९-२० |
| * जलपर्यावरण व मत्सजगत | विवेक रो. वर्तक | २१-२२ |
| * इरोजन नियंत्रण भूत- वर्तमान व भविष्य | आर. बी. पाटणे | २३-२४ |
| * भात पिकांच्या अधिक उत्पादनासाठी
निळे- हिरवे शेवाळ |
जयंत कुलकर्णी | २५-२६ |
| * स्वयंसेवी संस्था आणि आर्थिक सुधारणा | डॉ. मुकुंद घारे | २७-२९ |
| * करटोली | डॉ. हरिश्चंद्र कापसे | ३० |
| * विदर्भात मोहरीची लागवड फायदेशीर | डॉ. बी. एस. चिमूरकर | ३१-३३ |
| * कृषी उत्पादनाचे विक्री केंद्र | डॉ. नेताजी स. लोहार | ३४ |
| * यशोगाथा- ठिंबक तूर व तुरीचा खोडवा | वि. ग. राऊळ | ३५-३६ |
| * गिरीराज कोंबडी | एस. के. देशमुख | ३७-३८ |
| * फळ प्रक्रीया | कु. संगिता रा. राठोड | ३९ |
| * कांदा बाजारभाव | ४०-४१ | |
| * नविन लागवड केलेल्या फळझाडांची निगा | जी.जे. तूपकर | ४२ |
| * पणन वार्ता - दलाल पद्धतीतील बदलासाठी प्रयत्न - रिटेल मध्ये एफडीआय - म. गांधाचे भूकमुक्त भारत स्वप्न साकार झाले पाहीजे - नविन सहकार कायदा हिवाळी अधिवेशनात मांडणार - धान पिकासोबत कांद्याचीही लागवड करा |
४३-४५ | |
| * कृषि व्यापाराच्या नव्या दिशा | पद्माकर देशपांडे | ४६ |
| * पावसाचे पाणी जिरविण्यासाठी नैसर्गिक 'बुढई' उत्तम |
दिनेश एम. डागा |
४७ |
| *खानदेशाच्या पशुपालनासाठी उपयुक्त वृक्ष:अंजन | शांती लाहोटी | ४८ |
| * ट्रॅक्टर सुरु करण्यापुर्वी | ए.ए. देवगिरीकर | ४९ |